Monday, October 10, 2016

हमर गौं फना ले एस्से होइ यार ।

ओ रे भुला के है ऋ पे झर फर । यां सब भौल है रो बल । हमर गौं फना ले एस्से होइ यार, दिन भर खोई म भे बेर उल्ट सिद्ध बात करि, दिन काहुँ कटि जानि के पत् नि लागूं ने ।

उ मल बाखोई मास्टर साब रुणी बल , रिटायर है गयीं पे । अब के काम होइ ने । उनर च्यल छू पे एक, जब ताले घर नई ए जां मास्टर साब ताकने मेई ठहरे दिनमान भर कब आल कबेर । जिसके च्यलक खुट घर भितेर पड़ौ मास्टर साब शुरू है जानि ।

मास्टर साब: पे रमुआ तू बाजार जे रे छी , के बात है गए इतु देर किले ले पड़ि?

रमुआ: के ने बाबू । उ औण बखत उ खोई पार वाल धीरू मिल गो छी । वीक दगडी बात चल रे छी पे । देर है पडी।

मास्टर साब: पे निखजले तू रणकरा। अपर्ण काम झन करिये हाँ , एस्से उल्लू पठा दगडी टैम बर्बाद करिये हाँ ।

रमुआ: बाबू यार तुम दिमाग खराब नई करो हो । तुमर ले रोज का बकबकाट ठहरा । के important बात बतौर्ण छी धीरू ।

मास्टर साब: ओ हो रे important बल , निखद्द साल उल्लू पठा, इतु साल है गयी । आज ताले के जरूरी बात करि ? कमीन साल । धीरू तू मर्जले होइ , नास है जो त्यर ।

रमुआ: बाबू तुम म्यर दगाड़ियां  क किले गाई दिर्ण छा । उ बतौर्ण छी  वां मल बाखोई आजकल नयी किस्मक बिज़नस चल लौ बल , भौत्ते फैद है रो । लोग बाग़ ने तोहे डबल कमा के अउरी बात कर रखा है बल ।

मास्टर साब: सबास रमुआ । के काम छू बल?

रमुआ: किले अब कथां हूँ गो तुमर गुस्स? आयी ताले किले बोयी र छा , के हौ अब ? डबल नाम सुन बेर के हौ ? आयी ताले कुकुरां क चार बुकाबुक है रे छी ।

मास्टर साब: रमुआ नास है जो त्यर । मर्जले तू होइ । बाबू दगडी मजाक करछे , जाग साले उल्लू पठा कुकुर बुकाल त्यर भेलम तब लागल पत् ।

रमुआ: हा हा हा हा हा हा हा हा ।

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