Wednesday, September 21, 2016

डॉक्टशेब पैलाग


मनोहर: डॉक्टशेब पैलाग।

डॉक्टशेब: मनोहर हाय कसि  आछे आज ?

मनोहर: कदया  लाग गयीं हो डॉक्टशेब।

डॉक्टशेब: हाय  कशी ?

मनोहर:  अजयार चौमासा दिन होइ , गौं मजि खा हूँ  के होइ ने , मडुआ ठिठार गदुआ साग।  महाराज बजार औनी बॉटम तलि लि बेर मलि तक पेट खराब है रो मैसॉक। पुर-पुर-पुर-पुर , हगि बेर बाट खराब कर राखो, खुट धर ने कि जाग नई भे। अब मैं बुडी गयीं ने, आंखल देख़ नि  सकन , जसके  आँख बुजि गू म खुट ।  घिन ले पड़ि यार, लाग गयीं कदया।

डॉक्टशेब: के बात ने पे, लोग बाग़ ले दिमाग खराब है रो, जां मिलो वां हग दिनी ने ।  अब तीन चार दिन बाद न्हें जे पे। भौल है जाल।

मनोहर: ठिक छू डॉक्टशेब।

[कदया मतलब होता है घाव हो जाना जाना।]



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