Saturday, July 4, 2015

पहाड़ी क्लास ।

सर्दी जुखाम को ठन कहते, बर्तनों को भन कहते हैं,
छोटे बच्चों को नन कहत हैं, पिस्सू को उपन कहते हैं।।

साथ को दगड कहते हैं,क्वैरलिगं को झगड कहते हैं,
मोटे को तगड कहते हैं,मलने को रगड कहते हैं।।

शीशे को यहाॅ काॅच कहते हैं,सच्चे को यहां साॅच कहते हैं,
नृत्य को यहाॅ नाॅच कहते हैं, बंजर को यहाॅ बाॅज कहते हैं।।

छोटे भाई को यहाॅ भुल कहते हैं, किचन को यहाॅ चुल कहते है,
ब्रिज को यहाॅ पुल कहते है, नहर को यहाॅ कुल कहते है।।

पत्नी को यहाॅ सैणि कहते है,वहू को दुलैणि कहते है,
ब्याई भैंस को लैण कहते हैं,दूध दही को दुभैण कहते हैं।।

आदमी को यहाॅ मैंस  कहते हैं ,रुपयों को यहाॅ पैंस कहते है,
मौसी को यहाॅ कैंज कहते हैं,बफैलो को यहाॅ भैस कहते है।।

जीजा को यहाॅ भिन कहते हैं, अटौल को यहाॅ किन कहते है,
सख्त को यहाॅ जिन कहते है,गोबर को यहाॅ पिन कहते हैं।।

चावल को यहाॅ भात कहते हैं, शादी को बरात कहते हैं,
चौडे वर्तन को परात कहते हैं, पित्र तर्पण को शराद कहते है।।

पे भौत्ते धन्यवाद ज्योत्स्ना आंटी ज्यु। . इतु भौल पोस्ट लिजी।  किले की म्यर कपाओ मैं भी इतने आईडिया कहाँ आने वाले ठहरे।

1 comment:

Kavita Rawat said...

सर्दी जुखाम को ठन कहते, बर्तनों को भन कहते हैं,
छोटे बच्चों को नन कहत हैं, पिस्सू को उपन कहते हैं।
...बहुत ही बढ़िया ....