Thursday, June 11, 2015

गंजी कपाई ले परेशानी होइ पे यार।


खौर फुटहुँ है रो बल। आजकल तोह राति ले ब्याओ ले रकशी गयीं  यार, अउरी काओ  है रो  गरम बल।  इतु ले के होइ यार, जरा  कपाओ भ्यार नि  करना ठहरा , कर बेर देखो जरा , जातु बाल छि सब  भडि जाल।  जिनर बाल नि  हुनि , उनर लीजि ले मुसिबत होरी ठहरी फिर , अब गंजी कपाई लेके भ्यार जाने जैसा कहाँ होरा ठहरा यार।

अब तो के के नयी टेक्नोलॉजी ए गयीं यार, गंजी कपाई लेके जाने की टेंशन नि  छू बल अब।  अब तो कितने जो क्लिनिक खुल गयीं बल , नयी नयी किस्मक औजार ली बेर खौरम बाल रोप दिनी बल।  जसके धान की रोपाई होने वाली ठहरी , कपाओ मजि  बाल की रोपाई कर देने वाले ठहरे।

अब हसन किले लाग र छा यार , अब कतु जे भल dress पैर लिया , बाल जे नई होइ खुअरम के भल नई लागूं यार।  पेली बटी खाली लड़के गंजे होने वाले ठहरे , अब सब है जानी यार , चेली ले है जानी गंजी आजकल तोह।
कतु मुसीबत होइ पे , कहीं जाने से पहले  बाल  एडजस्ट करने पड़ते है कहा। टैम लगे बेर बाल बनाई , अब ज्यादा तेज हवा मैं भी भ्यार नई जा सकने वाले ठहरे , किले की अस्त व्यस्त है जानी बाल।

भौत्ते ठुल दिक्कत है गए यार।  एस्से हूँ पे।  एक बार जो बाल न्हे  गयी , पे के नु है सकूँ।  के करलिया के नई हॉल।  मिटटी टट्टी पत्त  ने के के लगे हैलो लोग बाग़ ने तोह , खेती उजड़ गयी एक बार , पे के नई है सकन।

पे उदासी के बात छू , सबब गंज है ऋ आजकल , फैशन है गो अब यो।  ब  जरा भडंग घाम में  झन्न जाया हाँ , किले की मुनो भडि जाल ने।

नमस्कार पे अब।

No comments: