Saturday, February 15, 2014

वैलेंटाइन्स डे है गो पे आज |

वैलेंटाइन्स डे है गो पे आज ।

है गो पे आज, पे यार कतु दिन बटी भूति ग छि यार लोग बाग़ । पे यार six - seven days बटी कभ्ते के - कभ्ते के है रो छि हो।
हग डे  ले छि, पेली मैल सोचि कोए दिन हुनल जब सब जनि हगभरी जां हुनल । अब हग से तो हम को एक ही बात समझ मैं आने वाली ठहरी |

अब पहाड़ फना कां हूँ ये सब । अटरम सटरम मैं ही दिन कट जाने वाले ठहरे, के पत् लागूं  वां के चल रो, पे यां दिल्ली मजि औरी काऊ है रे महाराज । जां देखला बेबी बाबू है रो। जतु च्यल दिखणि सबुक नाम बाबू पड़ रो , अब हमने तो बाबू पिताजी से ही कहा ठहरा , यां सब उल्ट हिसाब है रो , च्यल चेली सब बाबू बण गयीं रे ।

येसा होने वाला ठहरा यहाँ पे । अब जो फूल बेचनी वलांक ऐश है रे पे, ख़सोडा-ख़सोड कर राखि उनूल, एक गुलदस्ता लिजी कतु हज़ार डबल लिनि यार, लोग ले कम जे के छि, सड़ी काओपट्ट फूल लिजी होश खराब है ऋ सालांक ।
अब आजकल तो लोग daring हो गए हैं बल, पट-पट बात कर लीनी पे, हमर टैम पे तो किसी के लिए अच्छी लगरी भी नि कहना ठहरा, जां पत् लगो वाँ है गो पे, टीचर स्कूल मजी ठेच दी छि , घर ए बेर बाबू ले पटके दीर्ण होई। बबहो पे ।

अब आजकल तोह नान तिन कनि जब ताले लव नि हॉल शादी करनी ही नि है बल, अब के करण होई पे,  जमाना ले चेंज है गो ने, आजकल च्यल - च्येली सब तय कर लिनी पे, पेली बटी शादी बाद ले अकेले मैं बात करने मैं शर्म आने वाली ठहरी पे ।
अब आज मौसम ले घटाकोप है रो, दिन भर द्यो पड़ रो, लव बर्ड्स का तो फदिता हो गया होगा पे, मौल मजी यश है रो जसके कोई मेला लाग रो हुनल, इतने लोग तो मेले मैं भी कहाँ आने वाले ठहरे, नान-तिन त के बात ने बुड-बाड़ीक ख्वार ले रात पड़ रे, बुड-बाड़ी अपर्ण अलग लागि रयिं हो , मुखम दांत है गयीं ख़तम, आयी ले भूत सवार है रो.

एसा हो जाने वाल ठहरा यहाँ बल ।

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