Sunday, November 17, 2013

दीवाली, धनतेरस सब है गो पे।

दीवाली ले है गए पे। धनतेरस ले है गो। बधाई दिन ले भूल गयी कौ, के बात ने पे , बहुत्ते बधाई पे हाँ।
मकें भौतती ज्यादा अच्छा लगने वाला ठहरा दीवाली मजि, किले कि बम-भटेक फोड़ने ठहरे यार।

दीवाली मजी नानतिन ले औरी कर दिनी हो, पत् ने काँ बटी बम लानी कौ , इतु जोरेक आवाज़ करणी दरवाज़- खिड़की हिल जानि हो।  अब के कौण होई , नानतिन होई यार, किले कि हमूल ले अपने बचपन में खूब बम-भटेक फोड़े ठहरे । दिन रात के टैम नि देखण होई, दिन धुपरी ले।

येसा हो जाने वाला ठहरा फिर बल, आजकल मौसम भौल है गो अब, पहाड़ा फन मौसम भौल हूँ ने, किले कि वहाँ के जाड़े मैं बीमार पड़ने वाले नि ठहरे फिर, अब यान भाबर मजी हाथ-खुट टेड़ है जानी यार, गाऊ-गाऊ है जयें पे। आयी भौल है रो कि कोहरा नि लाग रो नतर इतु जाड़ा हो जाता ही कि कथां मरुँ वाल feeling आ जाती है कहा।

पे अब बम-भटेक फोड़ना ले कम कर हैलो पे यार, किले कि कुकुर छू म्य्र पास, वीक हालत खराब है जाँ ने, बमेक आवाज़ आयी नि मारहुँ बटी जाँ, पे नौक लागूं ने, पे इ वजल कम कर हैलो पे अब।  यस है रो पे। पे आजकल टेम ले नि लागूं ने के नयी जस लिखण लिजी। याँ दिल्ली मजी भ्यार सारि रोड खोद है ली यार, अब इलेक्शन टेम ए गो ने , जहाँ तहां गड्ढा कर राखी यार, अब दिन दुपारी के बात ने , अनयर मजी कोइ अपर्ण मुनो फोड़ राखौल कौ, किले कि अँधेरे मैं कथां दिखने वाले ठहरे गड्ढ़े।

यस्स कर राखौ पे हो। 

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