Thursday, October 3, 2013

नि ख़ानी बौड चुल्फन दौड़ |

आज बहुत दिन बाद घर ए रोयूँ पे, भौल लाग रो यार, मौसम ले भौतते भौल है रो हो, दुई दिन ब्टी के काम नि हैरो यार, खे पी बेर टेम निकल रो यार. भूख ले नि लाग रे, किले की काम के छू ने अब का ब्टी लागि पे |  अब घर फ़ना यसस हुनेर भे पे, अब ना ना के के बेर जतु टेम ले खाहूं मिलौल स्वेरा-स्वेर कर दिन होई | पे य होई नि ख़ानी बौड चुल्फन दौड़ |

पेली ब्टी जब नान छि, तब खाण बचण नि होई किले इज कुनेर भे नि खले जाग त्यर ख़्वारम लिप दियूल, पे डरे मारी सब खाण होई हो | अब आज नान-तिन ख़तरनाक है गयीं हो, के नि के सकच्छा हो, कभते केले दी उ-म-ले मु बने बेर भे जानी यार| 

अब डरण है गयीं हो इज बाबू ले, generation gap ले ए गो पे अब, किले की अब सब अपुन काम जाननी पे, पे ज़्यादे interference ले भौल नि हूँ यार, अब सबकी अपनी लाइफ भी तो ठहरी| अब हर समय खचोरा-खचोर ले के ठीक बात नि भे यार| अब जे ले छू  पे मौसम भौल है रो यार, clowds है री राति-ब्यओ |

घर मजी काम ले है रो आजकल, नयी गेट लाग रो, पेंट ले है गो, सफाई काम चल रो आजकल| यस्से है रो पे आजकल, यान बटी वाँ and vice-versa जस है रो पे|

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