Sunday, September 29, 2013

पहाड़ी शब्दकोष

पहाड़ी शब्दकोष अपडेट:

इतरि-बेर-खपिर : [ज़्यादा स्टाइल मारना]

कभते-कभते के हूँ जब कोई घर मजी लोग-बाग आए जानी, तब नान-तिन औरई कर दिनी ने... अब उनर सामणी ज़रा तारीफ के करी इतरी बेर खापिर है जानी... पे उई बाद के केद्यो महाराज, तुमर दिमाग़ खराब है जाल but उनर समझम के नि आल|

बुका-बुक : [बहस करना]

अब कभते के हूँ की घर फना लड़े है पड़ीं.. पे यो मार-पीट नि होई, पे म्यर ले है जे छि अपु भे दगड़... अब जब ज़्यादे है जां, पे इज कुनेर भोइ लीजो यो बुका-बुक....

किलाट-बिलाट : [शोर शराबा, ज़ोर से बच्चो का रोना]

अब यो अजीब होई हो... दूई चार नान-तिन के है जानी घर मजी....औरि कर दिनी हो... at once सब एक दगड़ी हल्ल मचे दिनी, यो होई किलाट-बिलाट.. दिमाग़ खराब है जान यार.

उदेग : [बोर हो जाना]

अब लोग कुनी ने की उदेग लाग गो, अब है जाँ यार यस ले किले की कभते-कभते के काम नि हूँ, एक जाग भे बेर ले है जाँ...

स्वेरा-स्वेर : [खूब खाना]

पेलि ब्टी घर फना खा हूँ के भौल मिल गोइ, अब इतु खे दीण होई अब बते द्युन.. रवाटांक स्वेरा-स्वेर है जाँ |

अणकस्य : [अजीब सा लगना]

यो ले उड़ेग ज हूई यार, अब के हूँ की mind disturb है जाँ ने.... अब कभते जब travel करनी ने तब है जाँ अणकस्य....

नमस्कार......

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