Monday, September 16, 2013

पत्त ने के है गो आजकल


आजकल भौतते भयानक है रो बल, लोग बाग पगली राइं कौ।  पत्त ने के है गो, मौसम ले बोई
रो बल, कभते घाम पड़ रो कभते घटाकोप अन्यरपट्ट है जां, गौ-बाकर ले औरि कर राखी हो। के पत्त के है रो, कुकुराल के बुका- बुक कर है लि, बाट मजी के-कले बुके दिनी रे।   

यस्से है रो आजकल, के प्त्त नि लाग रो। पर्बेई ताले सब ठीक है रो छि, आज जे है गो हुनल, लोग ले कतु किस्मक बात कर दिनी, जे ले हो वल्ला-पल्ला, अल्ला-सॅटा, मुखम जे आई ब भयार निकाल दिनी।  

यो जो लिख राखो, यो सब गों फना है रो।  आई metro city मजी जे नि हौल उ कम होई हो।  याँ राति-ब्यओ बज्ज़र पॅड रो, या ब्टी वाँ, कां ब्टी कां दौड़ है रे। बानर ज मु बने बेर भे रनि सब, जसके कैले थेच हुन्नल।  आजकल भौतते सावधानी बरतनी पड़ जाने वाली ठहरी यार ।  यस्से है रो पे हो. दिमाग़ खराब है गयीं ने, पे यस्से हूँ। एक तो दिमाग़ खराब है री, कम हॉल क बेर गरम ले इतु है जाँ के मुनओ फूटॉहून है जेया यार. के नि है सकन यार।








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